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International Yoga Day 2019 @ Lake Tosham

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तोशाम हरियाणा
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के तोशाम सेवाकेंद्र ,मेडिकल प्रभाग – राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन  और पतांजलि योग समिति ,तोशाम के सयुंक्त तत्वाधान में  अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर “परमात्म ज्ञान द्वारा विश्व परिवर्तन “ विषयक  कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में   योग प्रशिक्षक सतेंदर आर्या जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही वेदों एवं शास्त्रों में योग का महत्त्व लिखा गया है। योग तो हमारी प्राचीन संस्कृति में शामिल रहा है। योग भारत की परंपरा रहा है। इसका महत्व आज पूरी दुनिया समझने लगी है।  उन्होंने उपस्तिथ जनसमूह को योग के विभिन्न आसन बताते हुए समझाया की किस आसन के प्रयोग से हम किस रोग को ठीक कर सकते हैं। साथ ही उनका महत्व बताते हुए सभी से अभ्यास कराया। इस दौरान  लगभग 150 लोगों ने  उत्साह के साथ योग के आसन किए और इन्हें आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।

शारीरिक योग और राजयोग मेडिटेशन का महत्व बताते हुए तोशाम शाखा प्रभारी बी के मंजू ने कहा कि शारीरिक योग, प्राणायाम से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है, वहीं राजयोग मेडिटेशन से हमारी आत्मा की शक्तियां जागृत हो जाती हैं। इससे मन शक्तिशाली हो जाता है और मन में सकारात्मक व शुद्ध विचार उत्पन्न होने लगते हैं। उन्होंने कहा की अगर जीवन में सच्चा सुख और शांति चाहिए तो सबसे पहले  नकारात्मक विचारोंको दूर करना होगा।मन में अगर किसी के प्रति इर्षा ,घृणा भाव है तो वो जैसे की किचड़े का डिब्बा है।इसलिए हमें हमेशा सकारात्मक चिंतन करना है।

Brahma Kumaris tosham

गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन EV Gireesh Bhai Ji | 05May26

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LIVE संगम – गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन EV Gireesh Bhai Ji |05-05-2026 | 10.00am Tosham

संगम – गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन

विषय परिचय:

वृद्धावस्था जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि अनुभव, ज्ञान और आध्यात्मिक परिपक्वता का स्वर्णिम काल है। यदि इस अवस्था में मन प्रसन्न, बुद्धि सकारात्मक और आत्मा शक्तिशाली हो, तो जीवन सम्मान, संतोष और आनंद से भर जाता है।

इस विशेष संगम में जानें—

वृद्धावस्था को बोझ नहीं, बल्कि जीवन की उपलब्धि कैसे बनाएं।
शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को संतुलित रखने के आध्यात्मिक उपाय।
राजयोग मेडिटेशन द्वारा तनाव, अकेलेपन और भय से मुक्ति का मार्ग।
परिवार एवं समाज में सम्मान, आत्मविश्वास और सकारात्मक संबंध कैसे बनाए रखें।
जीवन के प्रत्येक क्षण को उद्देश्यपूर्ण, शांतिपूर्ण और आनंदमय बनाने की प्रेरणा।
आध्यात्मिक मूल्यों के माध्यम से सुख, शांति और आत्मबल से भरपूर जीवन जीने की कला।

वक्ता:
ई.वी. गिरीश भाई जी

संदेश:
“वृद्धावस्था उम्र की नहीं, बल्कि दृष्टिकोण की पहचान है। जब आत्मा परमात्मा से जुड़ती है, तब जीवन का प्रत्येक पल गौरव, सम्मान और आनंद से भर जाता है।”

ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा समाज में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, आत्मनिर्भरता एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “संगम – गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन” विषय पर एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ राजयोग शिक्षक ई.वी. गिरीश भाई जी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि वृद्धावस्था जीवन का अवसान नहीं, बल्कि अनुभव, ज्ञान और आध्यात्मिक परिपक्वता का स्वर्णिम चरण है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती मानसिक चुनौतियों, अकेलेपन और तनाव के बीच राजयोग मेडिटेशन वरिष्ठ नागरिकों को आत्मबल, मानसिक शांति और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है। जब व्यक्ति स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा से जुड़ता है, तब जीवन में नई ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास का संचार होता है।

गिरीश भाई जी ने बताया कि परिवार और समाज में वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका केवल मार्गदर्शक की नहीं, बल्कि संस्कारों एवं मूल्यों के प्रेरक स्रोत की भी है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वृद्धजनों को सम्मान, स्नेह और सहयोग प्रदान कर उन्हें गरिमापूर्ण एवं सुखद जीवन जीने का वातावरण दें।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास किया तथा आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाकर स्वस्थ, सम्मानित एवं आनंदमय वृद्धावस्था का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान की भावना को सशक्त करना तथा आध्यात्मिक मूल्यों के माध्यम से सकारात्मक एवं संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देना रहा।

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Diwali 2019 @ Tosham

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Navratri 2019 @ Tosham

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